इस अंक की दवा |
लिथियम कार्बोनेट |
बाल मन |
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किताब के बहाने |
श्रेष्ठता ग्रंथि से पीड़ित लोग : कुमार मुकुल |
मनोव्यथा |
हर कार मेरा पीछा कर रही थी : कमल |
मीडिया पर निगाह |
बाजार ही मीडिया का राष्ट्र और धर्म है : अनिल चमड़िया |
क्रूरता की शिनाख्त |
टीवी एंकरों की खुदकुशी और टीआरपी : मृणाल वल्लरी |
विश्लेषण |
अवसाद : चारुवाक |
सपने |
मेरे तीन सपने : उनका क्या करूं ? : बोधिसत्व |
जनगीत |
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कहानी |
मुश्किल : सन्तोष चौबे |
काव्य कथा |
शान्ता : उद्भ्रान्त |
फिल्म |
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| व्यंग्य | झूठ बोलने के फायदे : विष्णु नागर |
| अंक – 1 वर्ष – 1 जनवरी–मार्च, 2008 | |
बातचीत |
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अपनी कविताओं में मनुष्य और उसके जीवन के प्रति समाहित होनेवाले कथ्य को आप किस रूप में देखते हैं ? पानी में घिरे हुए लोग शीर्षक कविता की रचना प्रक्रिया के बारे में बताएं। कविताएं किसी एक मनःस्थिति से नहीं लिखी जाती हैं। हर कविता के पीछे एक विशेष अनुभव संदर्भ होता है और एक खास मनोभूमि भी। ÷ पानी में घिरे हुए लोग ' मैं बाढ़ग्रस्त इलाके का रहनेवाला हूं। अब तो बड़े बांध बन गए हैं और बाढ़ उस तरह से नहीं आती। यह कविता मेरे बचपन की स्मृतियों से निकली हुई है और मैं मानता हूं कि एक रचनाकार की सबसे बड़ी पूंजी उसके बचपन की स्मृतियां होती हैं , क्योंकि उस समय एक बच्चे या किशोर का मन कोरी सलेट की तरह होता है और उस पर जो भी बाहरी प्रभाव पड़ता है। वह हमेशा के लिए अंकित हो जाता है। स्मृतियां आदमी के वयस्क हो जाने के बाद भी बार-बार लौटकर चेतना के धरातल पर आती हैं और यह काव्यात्मक संपदा लेखक के बड़े काम की होती है। जर्मनी के महाकवि रिल्के , कहा करते थे– ÷÷ मैं तो उन स्मृतियों में निरंतर लौटने का इंतजार करता रहता हूं। '' मेरी कविता ÷÷ पानी में घिरे हुए लोग '' मेरी शैशवकालीन स्मृति का ही हिस्सा है। मेरी भोगी हुई जीवन स्थिति का हिस्सा है यह। विषयवस्तु की दृष्टि से अलग ढ़ंग की कविता ÷ नूर मियां ' के बारे में भी कुछ बताएं। आपके ठीक कहा , ÷ नूर मियां ' एक दूसरे प्रकार की कविता है। इस कविता में भी मेरा आरंभिक अनुभव लोक ही छिपा है जो अनुभव प्रौढ़ हो जाने के बार हिंदू-मुस्लिम समस्या के एक संदर्भ को लेकर इस कविता में उजागर हुआ है। एक स्मृति में यह कविता धार्मिक रागद्वेष तथा इसके पीछे की राजनीतिक सोच के गर्त से निकली है। ÷ नूर मियां ' तो उसके प्रतीक भर हैं। वस्तुतः यह देश विभाजन की त्रासदी पर लिखी कविता है। आपकी कविताएं अपनी रागात्मकता में लोक जीवन की संवेदना को खासतौर पर अपने फलक पर चित्रित करती हैं। लोक से इस लगाव के पीछे के कारक कौन से हैं... भारतीय कविता केवल एक नागर कविता नहीं है , नागर अनुभव विशाल भारतीय जीवन बोध का एक छोटा-सा हिस्सा है। मैं लोक अनुभव शब्द को भी थोड़ा व्यापक करके देखना चाहता हूं और इस क्रम में यह स्पष्ट कर दूं कि जिसे हम ÷ लोक ' कहते हैं वह केवल गांव में ही नहीं पाया जाता , वह शहर में भी हो सकता है। मेरी कविता में जो थोड़े-बहुत चरित्र आए हैं वे उसी तबका से आए हैं। ÷ नूर मियां ' लाल मोहर जगन्नाथ ये सब उसी संदर्भ से उठकर आने वाले चरित्र हैं और केवल कपोलकल्पित नहीं हैं। ये मेरे खूब जाने-पहचाने चरित्र हैं। कला की यह विशेषता होती है कि उससे जीवन यथार्थ से पहचाने चरित्र एक प्रतीकात्मक हैसियत अर्जित कर लेते हैं। यह कला की अपनी सहज प्रक्रिया है। आपके कविता संग्रह ÷ उत्तर कबीर ' में महान भोजपुरी कलाकार भिखारी ठाकुर की स्मृति में एक कविता है। इसकी रचना-प्रक्रिया के बारे में भी बताएं। भिखारी ठाकुर को बचपन में मैंने होश संभालने के बाद देखा था और उन नाटकों में देखा था जिससे वे जाने-पहचाने जाते थे। उनके नाटकों ने मुझे प्रभावित ही नहीं किया था बल्कि विचलित और आंदोलित किया था। खासकर उनके ÷ गबर घिचोर ' नाटक को देख कर ऐसा लगा था। मुझे यह बात हमेशा चकित करती रही। भिखारी ठाकुर का सृजनकर्म उस समय चल रहा था जब देश में स्वाधीनता आंदोलन जारी था और मैं इसी क्रम में बार-बार अपने आपसे यह सवाल पूछता था कि क्या उनके सृजनकर्म का स्वाधीनता आंदोलन से कोई नाता है। यह कविता इसी बात को समझने की एक कोशिश है। शायद इसके लिए और बड़ी कोशिश की जरूरत थी। लेकिन मैंने केवल एक प्रश्न उठाकर कविता को समेटने की कोशिश की है कि नाच का आजादी से क्या रिश्ता है। शायद यह पूरी कविता उसी रिश्ते की दिशा में कुछ संकेत की रोशनी फेंकती है , किसी हद तक। यह पत्रिका ÷ मनोवेद ' आपको कैसी लगी... एक तो इस पत्रिका का नाम मुझे नया लगा और यह मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में एक सक्रिय अभियान है। अरस्तू ने त्रासदी की व्याख्या करते हुए ÷ विरेचन ' जिसे अंग्रेजी में कैथेरेसिस कहते हैं , की बात की थी। यह चिकित्सा शास्त्र का दाय शब्द है और संकेत करता है कि दुखात्मक अनुभवबोध की रचना मनुष्य को आस्वाद की रसात्मक प्रक्रिया में एक बेहतर मनोभूमि की ओर ले जाती है अर्थात् स्वस्थ बनाती है। ÷ मनोवेद ' पत्रिका के पीछे भी कहीं-न-कहीं यही उद्देश्य है और एक रूप में यह अरस्तू के अभिप्राय की सार्थकता को ही प्रमाणित करती है। संपर्क : पोस्ट बड़हिया , जिला लखीसराय- 811302 ( बिहार) ... |