मेरे तीन सपने : क्या करूँ इनका ?
बोधिसत्व
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हिन्दी कविता के परिचित हस्ताक्षर बोधिसत्व अपने सपनों से परेशान हैं। वे उसे लेकर सइबर दीवाने आम यानी अपने ब्लाग विनय पत्रिका पर आ गए हैं और उन्हें ब्लागर मित्रों की टिप्पणियां भी प्राप्त हुई हैं। आगे हमें मनोचिकित्सकों की टिप्पणियों का इंतजार रहेगा।–संपादक
पता नहीं आप लोगों के साथ ऐसा है या नहीं पर मेरे साथ है। मेरे ऐसे तीन सपने हैं जिन्हें मैं पिछले 25 सालों से देख रहा हूँ ये सपने तब आते हैं जब मुझे तेज बुखार हो या मन को कोई धक्का लगा हो। सपने आने कबद्यशुरू हुए साफ-साफ नहीं कह सकता।
मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि ऐसा क्यों है। इन सपनों में मेरी उम्र कोई 12 से 13 साल के बीच होती है। मजे की बात यह है कि जब बहुत दिनों तक ये सपने नहीं आते तो भी उलझन होती है। मैं इन सपनों को देखना चाहता हूँ। मेरी पत्नी के मामा जो कि पुराने यानी साम्यवादी रूस में डॉक्टर थे अभी फिलहाल लखनऊ में अपना अस्पताल चलाते हैं का कहना है कि मुझे इन सपनों के बारे में किसी से मिलना चाहिए। वो इन सपनों को किसी और तरह से देख रहे थे जिससे मैं सहमत नहीं था। सो मैंने किसी मनोविज्ञानी से मुलाकात नहीं की और सपने हैं कि मेरा साथ नहीं छोड़ रहे हैं।
पहला सपना
मैं एक लगभग 30-35 फीट गहरी सूखी नहर में टहल रहा हूँ जिसकी दीवारें बेहद चिकनी और गीली हैं। अचानक पीछे से 20-25 फीट मोटी पानी की लहर मेरे बहुत करीब आ जाती है। मुझे लगता है कि मैं डूब जाऊँगा। मैं पूरी गति से आगे की तरफ भागता हूँ पीछे से पानी की तेज धारा मुझे अपने भीतर समोने के लिए करीब से करीब आती जाती है और मैं जाग जाता हूं।
दूसरा सपना
मैं अपनी किसी बाँह का तकिया लगा कर लेटा होता हूँ और लाखों मीटर रंग बिरंगे कपड़े मेरे ऊपर गिरते जाते हैं। मेरा दम फूलने लगता है। मैं उन कपड़ों से निकलने की जगह उनकी रंगीनी में खो जाता हूँ। खुद को बचाने की कोई कोशिश नहीं करता।
तीसरा सपना
मैं ऊँची या लंबी कूद में हिस्सा ले रहा हूँ। मेरे साथ कूदने वाले को पछाड़ने के लिए मैं आराम से कूदता हूँ और उड़ने लगता हूँ। यह उड़ान बिना कोशिश के होती है।
मैं खूब आनन्द में होता हूँ। सब हार जाते हैं और मैं सारे रेकार्ड तोड़ कर रख देता हूँ और उड़ते-उड़ते ही घर चला जाता हूँ। इसमें मैं जागता अक्सर खुद से नहीं हूँ।
पहले दो सपने लगभग सोते ही आते हैं और तीसरा भोर के आस-पास। यहाँ यह भी बता दूँ कि पहले दो सपनों के बाद मेरी हालत खराब होती है तो तीसरा सपना मुझे बेहद ताजगी से भर जाता है।
तीनों मेरे ही देखे सपने हैं। मैं तीनों को प्यार करता हूँ। पर द्यशायद पहले दो को देखना नहीं चाहता। पर खो देना भी नहीं चाहता।
ब्लॉगर्स की टिप्पणियां–
नीरज : पहले दो आने चाहिए तीसरा नहीं। भोर के पहले गहन अंधियारा होता है लेकिन भोर होने को है। तीसरा मानमाफिक है। सिगमंड फ्रायड की गलतियों का मनोविज्ञान पढं+े।
घुघूती बासूती - उड़ने के स्वप्न मुझे भी बहुत बार आते हैं और ये सदा मुझे एक अनूठी मनःस्थिति में छोड़ जाते हैं।
संजीव त्रिपाठी–मनोविज्ञान एच ओ डी को रेफ़र कर दिया है ये पेज अपन!!
उड़ान तस्तरी–स्वप्न विज्ञान और सपनों का विश्लेषण अपने आप में एक पूरा ज्ञान क्षेत्र है। मनोविज्ञान इस विश्लेषण में सहायता जरूर कर सकता है. कहते हैं बार बार आने वाले एक ही सपने किसी न किसी घटना विशेष से जुड़े हैं जो आप के मन मस्तिष्क में घर कर गई है. मनोवैज्ञानिक उस घटना की तह तक पहुँच उसे भुलवाने में मदद करते हैं ताकि वो स्वप्न पुनः न आयें।
मेरे एक मित्र ने अपनी लापरवाही से एक बार जीवन की बहुत बड़ी अपॉरच्यूनिटि मिस कर दी, जो पुनः नहीं मिलने वाली थी. फिर कई वर्षों तक वो लगभग रोज ट्रेन छूटने का सपना देखकर जाग जाता था. मनोवैज्ञानिकों की सहायता से ही उसे पता लगा कि यह उस घटना से संबंधित था और वो इससे मुक्ति पा सका।
जैसा कि आप बता रहे हैं कि पहले दो आपको परेशान करते हैं, तो किसी मनोवैज्ञानिक की सहायता लेने में कोई नुकसान नहीं है।
परमजीत बाली- बोधिसत्व जी, आप का पहला सपना अच्छा नहीं है, मुझे तो ऐसा ही लगता है आयुर्वेद में भी बीमार होने से पूर्व व बीमार के बाद आए सपनों पर, रोग निदान के लिए पहले विचार किया जाता था।कृ
ग्यान पान्डे–आप तो स्वप्न में देखते हैं - यहां तो जाग्रत में स्वप्न देखते हैं और उन्हें लेकर परेशान रहते हैं। उनका क्या करें?
बोधिसत्व - तो क्या मुझे सच में किसी मनोवैज्ञानिक से मिलना पड़ेगा। और कोई राह नहीं है।
आशुतोष–नहीं, कोई जरूरत नहीं है मनोवैज्ञानिक से मिलने की। तीनो सपने सामान्य हं,ै इनसे मिलते-जुलते सपने हर किसी को आते हैं। पहला सपना आप के भय को दूसरा आपकी कल्पनाशीलता को और तीसरा आपकी महत्त्व-आंकाक्षा को दिखाता है। सपने हमारे व्यक्तित्व के कुछ अचेतन पहलुओं की ओर एक ईशारा करते हैं। ये एक तरह का विरेचन भी है. इससे अधिक इनका और कोई अर्थ नहीं है।
विशाल श्रीवास्तव–सुना था मुंबई सपनों का शहर है। लेकिन इतने और ऐसे सपनों का शहर है, मालूम नहीं था।
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