इस अंक की दवा |
लिथियम कार्बोनेट |
बाल मन |
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किताब के बहाने |
श्रेष्ठता ग्रंथि से पीड़ित लोग : कुमार मुकुल |
मनोव्यथा |
हर कार मेरा पीछा कर रही थी : कमल |
मीडिया पर निगाह |
बाजार ही मीडिया का राष्ट्र और धर्म है : अनिल चमड़िया |
क्रूरता की शिनाख्त |
टीवी एंकरों की खुदकुशी और टीआरपी : मृणाल वल्लरी |
विश्लेषण |
अवसाद : चारुवाक |
सपने |
मेरे तीन सपने : उनका क्या करूं ? : बोधिसत्व |
जनगीत |
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कहानी |
मुश्किल : सन्तोष चौबे |
काव्य कथा |
शान्ता : उद्भ्रान्त |
फिल्म |
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| व्यंग्य | झूठ बोलने के फायदे : विष्णु नागर |
| अंक – 1 वर्ष – 1 जनवरी–मार्च, 2008 | |
नोटिस बोर्ड |
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¨ नींद में कमी , भूख में कमी , क्रोध आना , तोड़-फोड़ , मार-पीट , बेवजह डर , शक , बहुत कम या बहुत अधिक बात करना , अकेले बैठकर बुदबुदाना या मुस्कुराना , डायन या भूत का डर , कोई कहीं नहीं बोले तब भी आवाज सुनना , पत्नी को पति के अथवा पति को पत्नी के चरित्र पर बेवजह शक , गांजा , भांग , शराब , स्मैक आदि की लत। ¨ सिर में दर्द , धड़कन , घबराहट , अचानक ऐसा लगना कि जान चली जाएगी , उदासी , किसी काम में मन न लगना , खुशी की बात में भी खुश न होना , आत्महत्या की इच्छा या कोशिश , अपने को अपनी हैसियत से बड़ा मानना , अधिक पैसा खर्च करना , कामोत्तेजना का अभाव या अतिरेक। ¨ दांत लगना , ऐसी बेहोशी जो मिर्गी न हो तथा जिसमें रोगी असामान्य व्यवहार करे। ¨ औरतों में मासिक धर्म , गर्भावस्था अथवा प्रसव के बाद तथा मासिक धर्म बंद होने के बाद बेचैनी , उदासी तथा असामान्य व्यवहार। ¨ बार-बार हाथ धोना , एक ही बात दिमाग में बार-बार आना , ताला बंद करने पर बार-बार जांच करना , गिने हुए रुपए को भी बार-बार गिनना। ... |