इस अंक की दवा |
लिथियम कार्बोनेट |
बाल मन |
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किताब के बहाने |
श्रेष्ठता ग्रंथि से पीड़ित लोग : कुमार मुकुल |
मनोव्यथा |
हर कार मेरा पीछा कर रही थी : कमल |
मीडिया पर निगाह |
बाजार ही मीडिया का राष्ट्र और धर्म है : अनिल चमड़िया |
क्रूरता की शिनाख्त |
टीवी एंकरों की खुदकुशी और टीआरपी : मृणाल वल्लरी |
विश्लेषण |
अवसाद : चारुवाक |
सपने |
मेरे तीन सपने : उनका क्या करूं ? : बोधिसत्व |
जनगीत |
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कहानी |
मुश्किल : सन्तोष चौबे |
काव्य कथा |
शान्ता : उद्भ्रान्त |
फिल्म |
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| व्यंग्य | झूठ बोलने के फायदे : विष्णु नागर |
| अंक – 1 वर्ष – 1 जनवरी–मार्च, 2008 | |
मीडिया पर निगाह |
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नमक मनुष्य और जानवर दोनों के लिए बहुत जरूरी है। नवम्बर को भारत सरकार के राजपत्र में एक अधिसूचना जारी की गई इसके बाद से आम लोगों को खाने के लिए नमक बाजार में कम होता गया और सरकार ने आयोडीन युक्त नमक को खरीदना अनिवार्य कर दिया। साधारण नमक अधिकतम दो रुपए किलोग्राम की दर से मिल जाता था। आदेश के लागू होने के बाद कई कम्पनियों का उत्पाद आयोडीन युक्त नमक का पैकेट लगभग आठ रुपए किलोग्राम की दर से बिकने लगा। भूमंडलीकरण का दौरा शुरू होने के बाद से ही देश में डेढ़ हजार करोड़ सालाना के नमक के कारोबार पर नजर लगी हुई हैं। आयोडीन युक्त नमक की अनिवार्यता से नमक का सालाना बाजार आठ-दस गुना बढ़ जाएगा। लेकिन आश्चर्यजनक है कि देश के विभिन्न हिस्सों में दौरा करने के दौरान यह देखा गया कि इस सरकारी जबरबाँदी की जानकारी आम आबादी को नहीं है। जबकि गाँव-गाँव में समाचार पत्रों की पहुँच काफी तेजी से बढ़ी है। पल-पल की खबर देने का दावा करने वाले टेलीविजन चैनलों की तादाद बढ़ती चली जा रही है। यह खबर लोगों के बीच में बाद में पहुँची है उससे पहले समाचार पत्रों और टेलीविजन चैनलों एवं रेडियो ने आयोडीन नमक की जरूरत की सूचना पहुँचा दी। यह सूचना इस तरह की खोज के साथ कि आयोडीन की कमी से बच्चे पढ़ने में पिछड़ जाते है। परीक्षा में बार-बार फेल हो जाते हैं। ... |