अटेंशन डेफिसिट हायपरएक्विविटी डिसॉर्ड
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अभिभावक के रूप में आप अपने बच्चे का जीवन गढ़ने में सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसी संभावना हो सकती है कि आपका बच्चा अटेंशन डेफिसिट हायपरएक्विविटी डिसॉर्डर (ए डी एच डी) का शिकार हो। आएं जानें कि–
ए डी एच डी क्या है ?
अटेंशन डेफिसिट हायपरएक्विविटी डिसॉर्डर (ए डी एच डी) एक मनोआचरणगत विकार है जो स्कूली बच्चों को प्रभावित करता है। यह विकार बच्चों की एकाग्रता, व्यवहार और सीखने की संपूर्ण प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
ए डी एच डी से कौन प्रभावित होता है ?
स्कूली उम्र के कम से कम 3-5 प्रतिशत बच्चों को ए डी एच डी होता है। लड़कियों की तुलना में यह लड़कों में तीन गुना ज्+यादा होता है। निम्न सामाजिक-आर्थिक वर्गों तथा ए डी एच डी से ग्रसित परिवार के बच्चों में ज्+यादा कॉमन होता है।
ए डी एच डी के संकेत व लक्षण क्या हैं ?
ए डी एच डी से ग्रस्त बच्चों में एकाग्रता बिगड़ने या अतिक्रियाशीलता या दोनों के संकेत दिख सकते हैं। यदि उनकी एकाग्रता कम है तो उन्हें ध्यान केन्द्रित करने, निर्देशों का पालन या काम पूरा करने में कठिनाई आ सकती है। यदि वे अतिक्रियाशील हैं तो चंचल और अधिक बातूनी हो सकते हैं। वे दूसरों को बीच में रोक सकते हैं या स्कूल जाना टाल सकते हैं। ए डी एच डी ग्रस्त बच्चों को स्कूल का काम पूरा करने, अन्य बच्चों के साथ चलने, निर्देशों का और नियमों का पालन करने में परेशानी हो सकती है।
इस तरह के आचरण यूँ तो सभी बच्चे कभी-कभी दर्शाते हैं मगर ए डी एच डी ग्रस्त बच्चों में ये आचरण ज्+यादा बार उभरते हैं जो अधिक तीव्र होते हैं और स्कूल व घर में अवरोध पैदा करते हैं।
इसका निदान कब होता है ?
ए डी एच डी का निदान सामान्यतः बचपन में होता है, यद्यपि यह स्थिति वयस्क होने पर भी जारी रह सकती है।
निदान कौन करता है ?
ए डी एच डी का निदान अभिभावक, शिक्षक और मनोचिकित्सक करते हैं, फिर भी इसकी पुष्टि मनोचिकित्सक ही करते हैं।
यह किस कारण होता है ?
वर्तमान अनुसंधान दृढ़तापूर्वक सुझाते हैं कि ए डी एच डी मस्तिष्क के निचले क्षेत्र में एक विशिष्ट न्यूरोट्रान्समीटर के अभाव के कारण होता है।
यह कितने समय तक रहता है ?
वर्तमान जानकारी सुझाती है कि क़रीब 50 प्रतिशत ग्रस्त बच्चों में यौवन प्राप्त होने पर ए डी एच डी से मुक्ति मिल जाती है, शेष में संभवतः वयस्क होने तक जारी रहता है।
सीखने की अक्षमता और भावनात्मक विकारों के लक्षण क्या हैं ?
पढ़ने तथा भाषा या गणित में समस्याएँ सीखने की अक्षमता के संकेत हो सकते हैं। अत्यंत जिद्दीपन, निर्देशों का पालन करने से नकारना और पारा चढ़ जाना : भावनात्मक समस्या के संकेत हो सकते हैं जिसे अपोजि+शनल डिफाएंट डिसॉर्डर कहा जाता है। दुखी और हताश होना अवसाद के संकेत हो सकते हैं।
इसे नियंत्रित करने का तरीका क्या है ?
ए डी एच डी का उपचार लक्षणों के नियंत्रण, कक्षा में शिक्षा और व्यक्तिगत संबंधों और वयस्क जीवन में प्रवेश पर ध्यान केंद्रित करने से होता है। मापने योग्य परिणामों से दिशा मिलती है–जैसे शिक्षक से अनुशासनात्मक कारवाई के लिए सप्ताह में बुलावों
की संख्या, गृहकार्य पर खर्च समय या बिना अवरोध अन्य गतिविधियों में प्रतिभागिता। इस रोग के इलाज के लिए दवाएँ उपलब्ध हैं।
यदि लगे कि बच्चे को ए डी एच डी है तो क्या करना चाहिए ?
यदि आपको लगता है कि आपके बच्चे को शायद ए डी एच डी है तो आपको उनकी जाँच मनोचिकित्सक से करवानी चाहिए। कभी-कभी दृष्टि या सुनने की समस्या, परिवार का तनाव, चिंता, सीखने की अक्षमता या संवाद संबंधी समस्याएँ बच्चे की एकाग्रता और आचरण को प्रभावित करती हैं। आपको स्कूल के तंत्र से भी मदद लेनी चाहिए।
स्कूल का तंत्र मेरे बच्चे के लिए क्या कर सकता है ?
यदि आपका बच्चा स्कूल में पढ़ने के लिए जूझ रहा है तो लिखित रूप में स्कूल प्रबंधक से अपने बच्चे का मूल्यांकन मांगिए। मूल्यांकन का प्रयोजन यह जानना है कि आपका बच्चा स्कूल में अच्छा क्यों नहीं कर रहा है। आपके बच्चे का मूल्यांकन करने के लिए प्रोफेशनल्स की एक टीम आपके साथ काम करेगी।
कुछ सहायक सुझाव
अपने बच्चे के अच्छे गुणों पर ध्यान दें। दिन में कम से कम तीन बार अपने बच्चे के अच्छे आचरण को ÷देखें' और उसे बताएँ कि आपने उस पर ध्यान दिया था। दिन में तीन से अधिक बार करने का प्रयास करें।
जब अपने बच्चे की प्रशंसा करें तब उसे बताएँ कि आपने जो व्यवहार देखा, उसे आप अधिक बार देखना चाहेंगे–जैसे ÷÷सचमुच तुम आज मॉल में मेरे साथ ही रहे।''
अपने बच्चे को बताइए आप उससे क्या चाहते हैं। यह नहीं बताएँ कि आप क्या नही चाहते। (÷मत दौड़ो' के बजाय कहिए ÷चलो')
ए डी एच डी से ग्रस्त बच्चे को दवाइयों के कारण ठीक से खाने और स्थिर बैठने में तकलीफ होती है। ध्यान रखें कि आपके बच्चे को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन मिलता रहे।
आपके बच्चे के लिए व्यायाम भी काफी सहायक ह,ै लेकिन ध्यान रखें कि वह सुरक्षित रहे। ए डी एच डी से ग्रस्त बच्चों की उनकी उम्र के अन्य बच्चों से ज्+यादा निगरानी की ज+रूरत होती है क्योंकि वे सक्रिय और चंचल होते हैं।
अपने बच्चों को अच्छा समाजिक व संवाद कौशल सिखाएँ जो अन्य बच्चों से अच्छी मित्रता करने में उनकी मदद करेगा।
ध्यान दें कि बच्चे का ध्यान रखने वाले अन्य लोग दैनिक कामकाज और आरचणगत लक्ष्यों से परिचित हों। इससे आपके बच्चे को दिन भर एक समान व्यवहार मिलेगा।
हम ए डी एच डी से ग्रस्त बच्चे को बड़ा करने की चुनौतियों का सामना कैसे कर सकते हैं ?
शिक्षक तो हर साल बदलेंगे, लेकिन माता-पिता नहीं,
इसीलिए आप ही अपने बच्चे के श्रेष्ठ एवं सबसे महत्त्वपूर्ण शिक्षक हैं।
हर दिन अपने बच्चे के साथ एक समय में एक योजना करें। आपका सिर्फ 10-15 मिनट का साथ भी बच्चे को समझाने में सहायक होगा कि वह आपके लिए खास है। इस खास समय के दौरान अपने बच्चे के क्रियाकलापों पर नज+र रखें, इससे आप दोनों ही जुड़ाव और स्नेह का अनुभव करेंगे।
वैसा व्यवहार करें जैसा आप अपने बच्चे से चाहते हैं। एक अच्छा आदर्श बनें।
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