इस अंक में    वर्ष 1 अंक 1 अक्टूबर-दिसंबर 2008
  मन माने की बात

 

बातचीत
...छूटे हुए छाते हैं :
डॉ. विनय कुमार
समाज हमारा आविष्कार नहीं है और न ही भाषा।
दोनों का विकास हमारी बुनियादी ज+रूरतों के गहरे दबाव की वजह से हुआ है। ये ज+रूरतें जितनी देह पर आधारित
हैं, उससे तनिक भी कम मन पर नहीं। बात सिर्फ प्रजनन की होती तो हम भी शरीर से शरीर पैदा करते और

यह भौतिकवादिता नैतिकता विरोधी है :
डॉ. जे.एस.नेकी
मानसिक स्वास्थ्य पर केन्द्रित पत्रिका होने के नाते मनोवेद डॉ. जसवंत सिंह नेकी का परिचय भारतीय मनोचिकित्सा-जगत की एक गौरवशाली उपस्थिति के रूप में देना चाहेगा, मगर डॉ. नेकी का यह परिचय अत्यंत अपर्याप्त है। अंतर्राष्टीय ख्याति के मनोचिकित्सक होने के साथ-साथ वे पंजाबी कविता के एक महत्त्वपूर्ण ह

  बातचीत
मनोचिकित्सक की कलम से

साहित्य भी मन की ही रचना है :
उदय प्रकाश
किन लेखकों ने आपके मनोविज्ञान को प्रभावित किया...
सोलह की उम्र में दोस्तोएवस्की का उपन्यास जुर्म और सजा पढा था जिसका असर आज तक है। मैथिलीशरण गुप्त की पुस्तकों न, जिनमें जयद्रथ व8ा प्रमुख है, भी असर डाला था। तब गांवों में रामायण महाभारत और आल्हा घर-घर पढे हैं।

बुढाने से क्या घबराना :
डॉ. नरेन्द्रनाथ विग
हर वर्ष अक्तूबर 10 को विश्वभर में ÷विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस' मनाया जाता है। वर्ष 1999 में इस अवसर पर विचार का मुख्य विषय था.÷बुढ़ापा और मानसिक स्वास्थ्य'। यह अवसर इसलिए और भी अ8िाक महन्वपूर्ण हो गया था क्योंकि ÷संयुक्त राष्टᆭ संघ क्कयू.एन.ओ.त्र् ने भी ÷÷वृद्धों के अन्तरराष्टᆭीय वर्ष'' कल

मनोचिकित्सक की कलम से

 

मनोचिकित्सक की कलम से

मिर्गी-लक्षण, बचाव और उपचार :
डॉ.रूप सिडाना/डॉ.ललित सिडाना
प्रञति द्वारा दिए गए इस मानव जीवन में अन्य जीवों की तुलना में हमें एक विशेष योग्यता मिली है और वह है कम्प्यूटर की भाᆳति एक विकसित दिमाग, जो कि हमें जीवन के तौर-तरीके सिखाता एवं विभिन्न कायो को करने के लिए प्रेरित करता है। इस मस्तिष्क और उससे जुड़े इसके विभिन्न तारों की

एक अभागे हत्यारे की कथा
डॉ. प्रमोद कुमार सिंह
जागरूकता जगे होने के समान है। जागरूकता के लिए जानकारी की रोशनी आवश्यक है। हमारी इन्द्रिया भी जानकारी की रोशनी से प्रभावित होती हैं। अपने परिवेश से इन्द्रिया अ8िाकांशतः इतना ही ग्रहण कर पाती हैं, जितनी जानकारी उसके मन के पास होती है। एक कहावत है, श्म्लमे कव दवज ेमम ूींज ज  

मनोचिकित्सक की कलम से

  नोटिस बोर्ड
कामकाजी महिलाएं व मानसिक स्वास्थ्य : डॉ.ललित बत्रा
शहरी जनसंख्या में एक बड़ा हिस्सा कामकाजी महिलाओं का हैं । किसी भी क्षेत्रा में, चाहे वह शिक्षा, चिकित्सा, राजनीति हो या प्रशासन सभी जगहों पर महिलाएं कार्यरत हैं। आजादी के बाद हमारी सामाजिक एवं आर्थिक व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन आया है। इसके कारण कामकाजी महिलाओं की संख्या में
ऐलजाइमर डिमेन्शिया
डिमेन्शिया क्या है?
डिमेन्शिया एक ऐसी अवस्था है जिसमें मानसिक क्षमताए, खास तौर पर याददाश्त कम हो जाती है। व्यक्ति उन कामों को करने में दिक्कत महसूस करने लगता है जिन्हें वह पहले बहुत आसानी से कर लिया करता था। जैसे चेक बुक को सन्तुलित करना, सुरक्षित रूप से गाड़ी चलाना या भोजन की योजना बनाना आदि।

नोटिस बोर्ड

 

इस अंक की दवा

मानसिक रोगों के लक्षण
मानसिक रोगों की पहचान किसी एक लक्षण से नहीं की जा सकती। नीचे बताए गए अनेक लक्षण कभी-कभी सामान्य व्यक्तियों में भी देखे जा सकते हैं। भ्रम से बचने व सही पहचान करने के लिए मनोचिकित्सक से मिलें।
a असामान्य व्यवहार या सोच। नींद की गड़बड़िया, सामाजिक विमुखता, सामाजिक सम्बन्ो में गिरावट, ईर्षय

क्लोरप्रोमाजिन
मनोवेद के जनवरी-मार्च अंक में गंभीर मनोरोगों के एक समूह सायकोसिस की चर्चा की गई थी। जिन दवाओं से सायकोसिस का इलाज होता है, उन्हें एन्टीसायकोटिक कहा जाता है। इन दवाओं को न्यूरोलेप्टिक भी कहते हैं। न्यूरोलेप्टिक का अर्थ होता है, नसों पर काबू पाना। ÷नसों पर काबू' से तात्पर्य है कि ये दवाए अपने प्रभाव से सेवन करनेवालों को सुस्त करती हैं नि

किताब के बहाने

 

निष्कलंक

एडलर : क्रोध ,चिंता व अन्य भावावेग...
कुमार मुकुल
शिक्षा किसी भी सभ्य समाज में रची-बसी होती है। स्कूल शिक्षण के आधार स्तंभ माने जाते हैं। जन शिक्षण के बिना कोई भी देश विकास नहीं कर सका है, क्योंकि शिक्षित जनता सतत्‌ विकास की प्रक्रिया की रीढ़ है। सदियों से स्कूल आधारभूत शिक्षा देने की संस्थाओं के रूप में काम कर रहे हैं और कहे

गुरुदन :
विनोद अनुपम
जिन्हें नाज है हिन्द पर वो कहाᆳ हैं' यह मूलतः गुरुदन की आवाज थी जो कमोबेश उनकी हर फिल्म में 8वनित होती थी। प्यासा के नायक विजय का अपना आदर्शवाद ही उसके लिए ग्रहण बन जाता है। उसे अपनी प्रेयसी, अपने मित्रा और यहां तक कि अपने सगे-सम्बं8िायों से भी 8ाोखा मिलता है।

निष्कलंक

 

मंतव्य

जौंटी रोड्स : मैदान और जिंदगी का विजेता
पंकज पराशर
मस्तिष्क अनगिनत तंत्रिका-कोशिकाओं क्कअनुमानतः 100 मिलियनत्र् तथा सहयोगी उत्तकों एवं रक्त नलिकाओं से बनी संरचना है। तंत्रिाकाएं-कोशिकाएᆳ आपस में तरह-तरह से संबंद्ध होती हैं। दो तंत्रिाका कोशिकाओं के बीच संवाद की भाषा रक्त रासायनिक तथा विद्युतीय होती है।हो
प्रिवेंटिव साएकाएटी की आवश्यकता
रामप्रकाश अनंत
हलांकि प्रिट मीडिया हो चाहे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रायः हर किस्म का मीडिया वर्ग अपनी सामूहिक गतिविधियों के मद्देनजर लगभग पूरी तरह से मनी मिटिंग, वीभत्स बाजारू उत्पाद में तब्दील हो चुका है; लेकिन उसका पाखण्डी और आतंककारी दंभ उत्तरोत्तर परवान ही चढ़ता जा रहा है कि वह
 

क्रूरता की शिनाख्त

जीने का क्रूर लालच : मदन कश्यप
   

आलेख

बहुआयामी बुद्धिमना : मीनू मंजरी

   

आत्मकथांश

पाप मेरे वास्ते है... : हरिवंश राय बच्चन
   

कहानी

नेलकटर : उदय प्रकाश

 

 
कविता
विजय कुमार , अनीता वर्मा , शिव के. कुमार
   
अपना ही अक्स
नारी तुम केवल श्रद्धा हो' की आत्मा : अरुणा राय

अपना ही अक्स

आत्मा की तेरहवीं : पल्लवी त्रिवेदी
   
व्यंग्य
जब हम न होंगे : विष्णु नागर
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